A Project Of Rozgar world Assist By Public Contribution
लघु एवं कुटीर उद्योग के तहत महिला सशक्तिकरण एक ऐसा बिजनेस जो सभी को स्वरोजगार दें
  • स्थापना वर्ष - 2013
  • प्रधान कार्यालय : सैदपुर, बख्तियारपुर, पटना-803202 (बिहार)
  • Reged. of Bihar Government - S000657/2016-17

विद्यार्थी (सुविधायें) सहयोग शुल्क- 750/- (दो फोटो)

फ्री सिलाई मशीन एवं नामांकन का पैसा वापस लेने का तरीका

    1. कम से कम पाँच कला सिखने (विद्यार्थी के लिए)
    2. 15 नामांकन कराने वाले (विद्यार्थी के लिए)
    3. पाँच सेंटर खुलवाने (सभी व्यक्ति के लिए)

विद्यार्थी (सुविधायें)

  1. कम से कम 15 महिला/लड़की के समूह में रोजगार सेंटर दिया जायेगा।
  2. सर्टिफिकेट (परीक्षा के बाद)
  3. रोजगार (पाँच कला सिखने के बाद)
  4. कर्ज- 10,000 (दस हजार) से 50,00, 000 (पाँच लाख) तक, 3 साल तक ब्याज माफ होगा, कोई साप्ताहिक किस्त नहीं केवल मासिक (पाँच कोर्स सीखने के बाद)
  5. नौकरी- वेतन- 5,000 रू0 (पाँच कोर्स सीखने के बाद)
  6. समय- 2 घंटे
  7. स्थान- सेंटर संचालक के घर में
  8. कोर्स- जब तक चाहे, निशुल्क प्रशिक्षण कार्ड के माध्यम से

प्रशिक्षण सामग्री:-

सेन्टर शुरू करने के लिए 10 दिन का सामान सोलह कैची, 15 रील धागा, एक पैकेट सूई, 5 किलो कागज, 15 इंच टेप, एक पैकेट चौक, दो रजिस्टर, एक बैनर, एक कलम दिया जायेगा।

मशीन खराब होने पर संस्था 250/- रू0 तक देगी, इसके अलावा सभी विद्यार्थी को आपसी सहयोग से बनाना होगा।

  • 5 किलो पेपर के लिए 100/- रू0 खरीदने के लिए दिया जायेगा।
  • कपड़ा काटने वाला का कैंची अपना लाना होगा।
  • प्रतिदिन 4 विद्यार्थी मशीन सिखने का काम आधा-आधा घंटा करेंगे।
  • सिखने का सामान अपना स्वयं का लाना होगा।
  • सिखने का सामान स्वयं/ अपना लाकर सिखना होगा।
  • अनुपस्थिति फाईन- 5/- प्रति विद्यार्थी (प्रति दिन)
  • नामांकन प्रचार खर्च- 100 रूपया (प्रति विद्यार्थी)

(सेन्टर शुरू होने के बाद सिर्फ विद्यार्थी, सुपरवाईजर रोजगार मित्र एवं सेंटर मित्र के लिए) नामांकन का बकाया राशि 1 सप्ताह में जमा करना अनिवार्य है। नही करने वाले सभी व्यक्ति से 100 रू0 प्रति सप्ताह फाईन लिया जायेगा और 10वें दिन तक नहीं जमा करने वाले का नाम काट दिया जायेगा।

सहयोग

  • सहयोग करने वाले विद्यार्थी को सभी प्रकार का रोजगार सीखाया जायेगा।
  • जितनी जल्दी-जल्दी दुसरी कला का लोकल टीचर खोज कर देंगे उतनी जल्दी-जल्दी सीखाया जायेगा।
  • फ्री में सभी प्रकार का कला सिखाने के लिए सेंटर के सभी विद्यार्थी को 2 विद्यार्थी या 2 सेंटर संचालक या 2 रोजगार मित्र या 2 सुपरवाईजर या 2 सेंटर मित्र या 2 सेंटर खुलवाना या 2 दुसरी कला का टिचर खोजना अनिवार्य है।

सेन्टर खोलने का तरीका

  • नामांकन का पैसा संस्था के खाते में जमा कर रसीद ऑफिस में जमा करने के बाद सेन्टर शुरू किया जायेगा।
  • सेंटर खुलवाने के लिए सिलाई का काम या दूसरी कला जानने वाली महिला/लड़की खोजना है।
  • सिलाई या दूसरी कला की जानकारी वाली महिला/लड़की का काम है 15 महिला/लड़की खोजकर सभी से नामांकन शुल्क 750 रू0 और दो फोटो लेकर अपने घर से सेंटर शुरू करना।
  • जितना आप जानते है उतना सीखायें आगे के लिए जितना जल्दी दुसरी कला का लोकल टीचर खोजकर देंगे उतना जल्दी-जल्दी व्यवस्था दिया जायेगा।

दुसरी कला का गाईड लाईन

  • सहयोग करने वाली विद्यार्थी को ही दुसरी कला सिखाया जाएगा।
  • सहयोग करने का वक्त अधिकतम 10 दिन होगा।
  • विद्यार्थी के द्वारा अगर 15 दिन तक काम नहं बढ़ाया जाने वाले विद्यार्थी का नाम काट दिया जाएगा।
  • सेन्टर गाईड लाईन का पुरी तरह लागु करना होगा।
  • संस्था के काम की ट्रेनिंग पुरी करने वाले सेन्टर संचालक को ही दुसरी कला सिखाने का काम दिया जाएगा।
  • दुसरी कला को शुरू करने से पहले विद्यार्थी सूची को ऑफिस से प्रमाणित करवाना अनिवार्य है।
  • सूची में विद्यार्थी का नाम एवं मोबाईल होना अनिवार्य है।
  • साप्ताहिक सूची ऑफिस में जमा करनी होगी।
  • विद्यार्थी के द्वारा बढ़ाए गए काम का विवरण साप्ताहिक जमा करना।
  • सेन्टर संचालक के द्वारा बढ़ाए गए काम का साप्ताहिक रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है।
  • विद्यार्थी सेन्टर संचालक, रोजगार मित्र, सुपरवाईजर, कर्ज पुरस्कार, सेन्टर खुलवाने का तरीका एवं काम-काज की पुरी जानकारी लेने के बाद ही दुसरी कला सिखााया जाएगा।
  • सेन्टर संचालक के वेतन से तीन गुणा बिजनेस करना होगा अन्यथा वेतन रोक दिया जाएगा (प्रति महीना)

विद्यार्थी का कर्तव्य

संस्था के द्वारा सभी विद्यार्थी को 9 प्रकार का प्रशिक्षण फ्री में दिया जाता है साथ में सभी तरह की सुविधा देती है। विद्यार्थी का नैतिक कर्तव्य बनता है कि सेंटर की संचालन में दिल से संस्था को आगे बढ़ाने में मदद करना चाहिए। क्योंकि यह सिस्टम सहयोग करने पर ही चलेगा जैसे हमलोगों का घर सहयोग से चलता है।

जैसे- सामाजिक काम या सरकारी काम या दशहरा, दीपावली, छठ, शादी विवाह में समाज की मदद की जरूरत पड़ती है। बिना मदद का यह संभव नही है उसी प्रकार से सभी लोग थोड़ा थोड़ा सहयोग करेंगे तो संस्था बहुत अच्छी व्यवस्था देगी।

जैसे- अकेला इनसान कुछ नहीं कर सकता है लेकिन सब मिलकर एक साथ करें तो बड़े से बड़ा काम आसानी से हो सकता है।

संस्था आपको क्या-क्या कब-कब, कितना- कितना और कैसे-कैसे एवं क्यों करवाना चाहती है। संस्था का मकसद क्या है, हम से क्या चाहती है। संस्था का वर्तमान एवं भविष्य की योजना क्या है। कही ऐसा तो नहीं कि हमलोगों को भविष्य में बड़ी जिम्मेवारी देना चाहती है। हमलोग समझ नहीं पा रहे हैं। इसलिए हमलोगों को जिम्मेवारी एवं जबावदेही के साथ संस्था के संचालन में सहयोग करना होगा।

नोट :- नामांकन का पैसा वापस नहीं होगा